ग्रंथालय व्यवसायिकों की कार्य संतुष्टि का स्तर
(Level of Job Satisfaction in Library Professionals)
अदिति जोशी1, डाॅ. हरीश कुमार साहू2
1ग्रंथालय एवं सूचना विज्ञान अध्ययनशाला, पं. रविशंकर शुुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर (छ0ग0)
2ग्रंथालय एवं सूचना विज्ञान अध्ययनशाला, पं. रविशंकर शुुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर (छ0ग0)
*Corresponding Author E-mail: hari197479@yahoo.in
ABSTRACT:
कार्य संतुष्टि का स्तर जानने के लिए अध्ययन में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों जैसे रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग जगदलपुर, भाटापारा, कोरबा आदि स्थानों से कुल 67 ग्रंथालय व्यवसायिकों से सूचना प्राप्त किया गया। ग्रंथालय व्यवसायिकों से प्राप्त सूचनाआंे के अंतर्गत निर्णय लेने की पूर्ण स्वतंत्रता में 50ण्74ः, कार्य करनें में पर्याप्त स्वतंत्रता के अंतर्गत 58ण्21ः, प्रशिक्षण के अवसर के प्रति 62ण्69ः, आत्मसम्मान की वृद्धि के लिए 70ण्15ः, प्रशिक्षण के अवसर के प्रति 62ण्69ः, व्यक्तिगत विकास में योगदान के लिए 70ण्15ः, अच्छे कार्य के लिए प्रशंसा के लिए 68ण्66ः ग्रंथालय व्यवसायिकों में अपनी सहमति दी है। इसी प्रकार काई वर्ग का मान ज्ञात कर परिकल्पना का परीक्षण के आधार पर निष्कर्श निकलता है, कि लिंग के आधार पर कार्य संतुष्टि का कोई प्रभाव नहीं पड़ता इनके मध्य कोई सार्थक अंतर नहीं है एवं कार्य अनुभव भी कार्य संतुष्टि को प्रभावित नहीं करता, इनके मध्य भी कोई सार्थक अंतर नहीं है।
KEYWORDS: कार्य संतुष्टि, ग्रंथालय व्यवसायिक, निर्णयन, स्वाभाविक अभिप्रेरण, बाह्य अभिप्रेरण।
कार्य व्यक्ति के जीवन, जीवन की व्यस्तता एवं वित्तीय सहायता का महत्वपूर्ण पहलू है। किसी व्यक्ति का कार्य जीवन में उसे संतुष्टि प्रदान करता है। एक व्यवसायी या कर्मचारी को समाज में पहचान दिलाने, जरुरतें पूरा करने, शारीरिक सुरक्षा, आत्मसम्मान का आधार देने में कार्य महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रत्येक व्यक्ति चाहता है कि संगठन के विकास के साथ उसका विकास हो तथा उसके प्रबंधक या सहयोगी कार्यकर्ता उसके साथ सामंजस्य स्थापित कर उद्देश्यों की पूर्ति में सहायता करें। यह तभी संभव है जबकि संगठन के कर्मचारियों को उसके अनुसार वातावरण मिले, कार्य सुरक्षा प्राप्त हो तथा अन्य कार्यों में भी मानसिक शंति एवं खुशी मिलें।
कार्य की संतुष्टि का पैमाना कार्य के सकारात्मक भावनाओं तथा संज्ञात्मक मूल्यांकन का आंकलन करते हंै। भावनात्मक कार्य संतुष्टि एक व्यक्तिपरक भावना है जो एक भावना का प्रतिनिधित्व करता है जो लोग अपनी नौकरी के बारे मंे करते हैं। व्यक्तियों की कार्य संतुष्टि उनकी खुशी से संबंधित होती है। कार्य की संतुष्टि को कार्य की खुशी से मापना उसका केवल एक ही पहलू है। वेतन से संतुष्टि, पर्यवेक्षकों से संतुष्टि, अवकाश, समय जैसे बहुआयामी पहलू भी इसके प्रभावित करने वाले कारक है जो संतुष्टि के प्रति जिम्मेदार होते हंै।
1ण् कार्य संतुष्टि की अवधारणा
कार्य संतुष्टि एक मनोवैज्ञानिक वृत्ति है जो आकांक्षाओं की पूर्ति के परिणामस्वरुप पूर्ण होती है। संतुष्टि द्वारा असीम आनंद की अनूभूति होती है। कोई व्यक्ति यदि कार्य से संतुष्ट है तो वह ईमानदारी के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकता है।
अतः हम कह सकते हैं कि कार्य की संतुष्टि व्यक्तित्व और कार्य के सामान्य व्यवहार के बीच संबंधों का आंशिक रुप से मध्यस्थ का कार्य करता है।
2ण् कार्य संतुष्टि की विशेषता
कार्य संतुष्टि की निम्नलिखित विशेषतायें होती हैः-
1. कार्य संतुष्टि कौशल तथा सकरात्मक ऊर्जा प्रदान करती है।
2. कार्य संतुष्टि मानसिक क्षमता को प्रभावित करती है।
3. यह एक अमूर्त प्रक्रिया है इसका केवल अनुभव किया जा सकता है।
इस प्रकार कार्य संतुष्टि को एक भावनात्मक अनुभुति से परिभाषित कर सकते हैं जो किसी कार्य का परिणाम होता है।
3ण् अध्ययन का उद्देश्य
अध्ययन के उद्देश्य इस प्रकार हैः-
1. ग्रंथालय व्यवसायिकों की सुविधाओं की संतुष्टि स्तर को ज्ञात करना।
2. महिला एवं पुरुषों में कार्य संतुष्टि का अनुपात ज्ञात करना।
3. अभिप्रेरण के कारकों से संबधित कार्य संतुष्टि स्तर ज्ञात करना।
4. योग्यता के आधार पर ग्रंथालय व्यवसायिकों की कार्य संतुष्टि का स्तर ज्ञात करना।
4ण् अध्ययन के क्षेत्र
प्रस्तुत शोध कार्य में छत्तीसगढ़ क्षेत्र के विभिन्न जिलों रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग जगदलपुर, भाटापारा, कोरबा आदि स्थानों से कुल 67 ग्रंथालय व्यवसायिकों से प्रश्नावली के माध्यम से आकडों को संकलन किया गया। इस अध्ययन में उनके अनुभव, कार्य की प्रकृति, संस्था के प्रकार एवं कार्य समय के आधार पर आकडों को व्यवस्थित कर कार्य संतुष्टि को प्रभावित करने वाले कारकों पर उनकी सहमति एवं असहमति को ज्ञात किया गया है।
5ण् साहित्य की समीक्षा
कचरेकी उमेशरेडी एवं कन्नुर पीवी (2011) ’’आइजलिक बुलेटिन’’ द्वारा महाराष्ट्र राज्य के इंजीनियरिंग महाविद्यालयों के ग्रंथालयों में कार्य संतुष्टि का स्तर ज्ञात किया। अध्ययन में 132 ग्रंथालय व्यावसायिकों से प्रश्नावली के माध्यम से कार्य में संतुष्टि का स्तर ज्ञात किया गया। अध्ययन में पाया गया है कि अधिकतम 37.1ः ग्रंथपाल कम संतुष्ट है। इन्हें सूचना प्रौद्योगिकी के नवीन आयामों को सीखने के लिए प्रशिक्षण की आवश्यकता है। 50.8ः ग्रंथालय व्यावसायिक आॅनलाॅइन संसाधन से संतुष्ट हैं। अतः यह स्पष्ट है कि कार्य संतुष्टि महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे मानवीय स्थिति स्पष्ट होती है।
सिंग, अंगम जीवन (2014) ने मेघालय के गारो हिल्स के 43 शैक्षणिक ग्रंथालय के व्यावसायिकों में कार्य संतुष्ट का मूल्यांकन किया। अध्ययन में स्पष्ट किया कि 30 (70ः) व्यावसायी अपने कार्य की प्रकृति से संतुष्ट हंै। 11 (26ः) अपने वेतन से संतुष्ट हंै। जबकि अधिकतम 19 (44ः) असंतुष्ट हंै। 22 (5ः) कार्य स्वचालन तथा निर्णयन से संतुष्ट हैं और 14 (32ः) अपनी कार्य के प्रति सजग से संतुष्ट हैं। 26 (60ः) व्यावसायिक विकास से असंतुष्ट हंै। इनमें अधिकतर व्यवसायी निजी महाविद्यालय से संबधित है। 20 (47ः) ग्रंथालय के संग्रह से संतुष्ट, 23 (54ः) ग्रंथालय के भवन एवं फर्नीचर से संतुष्ट हैं जबकि 19 (44ः) ही अभ्यर्थी सूचना प्रौद्योगिकी की सुविधा से संतुष्ट हैं। 21 (49ः) ग्रंथालय विकास के लिए दिये जाने वाले ग्रंथालय बजट से असंतुष्ट हैं। अतः निष्कर्ष निकाला गया है कि 23 (54ः) ग्रंथालय व्यवसायी उपयोगकर्ता की संतुष्टि से संतुष्ट होते हैं।
बीजू आर (2015) ‘‘इन्टरनेशनल जर्नल आॅफ लाईब्रेरी एण्ड इन्फरमेंशन स्टडीज‘‘ ने केरला पब्लिक ग्रंथालय के 75 ग्रंथालय व्यवसायिकों के बीच कार्य सतुष्टि को ज्ञात किया और पाया कि केरला में इस विषय में बहुत कम शोध कार्य हुये हैं सर्वाधिक 64: व्यवसायी की प्रकृति से अत्यधिक सन्तुष्ट हैं, इसी प्रकार 56: व्यवसायी उपयोगकर्ता की संतुष्टि से ही संतुष्ट होते हंै। निष्कर्शतः कहा जाता है कि इस अध्ययन द्वारा ग्रंथालय में व्यवसायिकों को कार्य से संतुष्टि करने के लिए विभिन्न कारक हैं जिनके प्रभाव से संतुष्टि का स्तर बढ़ता है।
6ण् शोध प्रविधि
प्रस्तुत अध्ययन में ग्रंथालय व्यवसायिकों की कार्य संतुष्टि ज्ञात करने हेतु निर्दशन तकनीक एवं सर्वेक्षण प्रविधि का प्रयोग किया गया है। प्राथमिक आंकडों के संकलन के लिए प्रश्नावली उपकरण के माध्यम से प्राप्त अभिमतों को सारणी एवं ग्राफ के द्वारा अभिव्यक्त किया गया है।
7ण् आकड़ांे का विश्लेषण एवं प्रस्तुतिकरण
ग्रंथालय व्यवसायिकों से प्राप्त सूचनाआंे को आंकडों के माध्यम से निम्नानुसार प्रस्तुत किया गया है-
8ण्1 निर्णयन
ग्रंथालय व्यवसायिकों से प्राप्त निर्णयन से संबंधित कथनों के उत्तर को निम्नानुसार प्रदर्शित किया गया है-
सारणी क्रमांक 1 निर्णयन से स्पष्ट होता है कि कथन ’’आपको निर्णय लेने की पूर्ण स्वतंत्रता है’’ में 50ण्74ः ग्रंथालय व्यवसायिकों में अपनी सहमति दी है। जबकि 2ण्99ः ही व्यवसायी अत्यधिक असहमत हंै। “कार्य करनें में पर्याप्त स्वतंत्रता’’ के कथन में सर्वाधिक 58ण्21ः ग्रंथालय व्यवसायी सहमत है तथा 2ण्99ः उत्तरदाता अत्यधिक असहमत हंै। इसी प्रकार उनसे पुछे गये प्रश्न “आपके पर्यवेक्षक आपके निर्णयों पर प्रभाव डालते हंैै’’ मंे 53ण्7ः सहमत हंै। 26ण्9ः व्यवसायी अत्यधिक सहमत हंै।
8ण्2 स्वाभाविक अभिप्रेरण
ग्रंथालय व्यवसायिकों के स्वाभाविक अभिप्रेरण से संबंधित कथनांे के उत्तर की सहमति तथा असहमति का निम्नानुसार उल्लेख किया गया है-
सारणी क्रमांक 2 अभिप्रेरण के स्वाभाविक अभिप्रेरण से संबंधित हंै। इसमें प्रशिक्षण के अवसर के प्रति 62ण्69ः ने सहमति तथा 17ण्91ः ने असहमति, 1ण्49ः ने अत्यधिक असहमति प्रदर्शित की है। पदोन्नति के मापदण्ड से संतुष्टि में 41ण्79ः व्यवसायी सहमत तथा 20 ;29ण्85ःद्ध व्यवसायी असहमत हंै। कुल 23ण्88ः व्यवसायी इसके लिए तटस्थ हैं। 70ण्15ः व्यवसायी की सहमति काम करने से आत्मसम्मान की वृद्धि के लिए है। इस हेतु कोई भी व्यवसायी अत्यधिक असहमत नहीं हैं। 70ण्15ः व्यवसायी की सहमति व्यक्तिगत विकास में योगदान के लिए है। जबकि कोई भी इससे असहमत नहीं है, इसी तरह सेमीनार एवं सम्मेलन में भाग लेने के अवसर की प्राप्त होने के लिए 59ण्70ः व्यवसायी सहमत हैं।
8ण्3 बाह्य अभिप्रेरण
ग्रंथालय व्यवसायिकों के बाह्य अभिप्रेरण से संबंधित कथनों के उत्तर को निम्नानुसार सारणीबद्व किया गया है-
सारणी क्रमांक 3 बाह्य अभिप्रेरण से संबंधित है। इसमें कथन ’’मैं चुनौती पूर्ण कार्य का आनंद लेता/लेती हूँ’’ में अधिकतम 65ण्67ः ने सहमति तथा न्यूनतम 1ण्49ः ने असहमति व्यक्त की है एवं 68ण्66ः ने यह सहमति व्यक्त की है कि उनको अच्छे कार्य के लिए प्रशंसा मिलती है। जबकि केवल 2 ने असहमति व्यक्त की है। कुल सहमति का माध्य 45ण्00 ज्ञात किया गया।
8ण् परिकल्पना परीक्षण
प्रस्तुत अध्ययन में काई वर्ग का मान ज्ञात कर परिकल्पना का परीक्षण किया गया है -
सारणी क्रमांक 4 के अनुसार महिलाओं में 22 महिलाएं संतुष्ट तथा 18 पुरुष संतुष्ट पाए गए। इसके लिए स्वतंत्रता की श्रेणी 4 पर काई वर्ग का मान 0.357 ज्ञात हुआ यह मान 0ण्05 सार्थकता स्तर पर प्राप्त मान से कम है, अतः शून्य परिकल्पना स्वीकार की जाती है, निष्कर्श प्राप्त हुआ कि लिंग के आधार पर कार्य संतुष्टि का कोई प्रभाव नहीं पड़ता इनके मध्य कोई सार्थक अंतर नहीं है।
सारणी क्रमांक 5 कार्य अनुभव से संबंधित है जिसमें सर्वाधिक 5 से 9 वर्ष अनुभव वाले ग्रंथालय व्यवसायी कार्य से संतुष्ट हैं। परिकल्पना परीक्षण के अंतर्गत स्वतंत्रता की श्रेणी 16 के लिए काई वर्ग का मान 0.816 प्राप्त हुआ। यह मान 0.05 सार्थकता स्तर पर प्राप्त मान से कम है अतः शून्य परिकल्पना स्वीकार की गई। कार्य अनुभव कार्य संतुष्टि को प्रभावित नहीं करता, इनके मध्य कोई सार्थक अंतर नहीं हैं।
सारणी क्रमांक 6 ग्रंथालय व्यवसायी के विभिन्न पदों में कुल 17 ग्रंथपाल कार्य से संतुष्ट पाए गए तथा 13 सहायक ग्रंथपाल संतुष्ट पाए गए। अतः परिकल्पना परीक्षण के अंतर्गत काई वर्ग का मान 16 स्वतंत्रता की श्रेणी के लिए 0ण्176 प्राप्त हुआ यह मान 0ण्05 सार्थकता स्तर पर प्राप्त से कम है अतः इनके मध्य कोई सार्थक अंतर नहीं है।
10ण् निष्कर्श - अध्ययन के प्रमुख निष्कर्श इस प्रकार हैः
1ण् निर्णयन से संबंधित कथन ’’आपको निर्णय लेने की पूर्ण स्वतंत्रता है’’ में 50ण्74ःद्ध ग्रंथालय व्यवसायिकों में अपनी सहमति दी है। जबकि 2ण्99ः ही व्यवसायी अत्यधिक असहमत हंै। “कार्य करनें में पर्याप्त स्वतंत्रता’’ के कथन में सर्वाधिक 58ण्21ः ग्रंथालय व्यवसायी सहमत हैं तथा 2ण्99ः उत्तरदाता अत्यधिक असहमत हंै। इसी प्रकार उनसे पुछे गये प्रश्न “आपके पर्यवेक्षक आपके निर्णयों पर प्रभाव डालते हंैै’’ मंे 53ण्7ः सहमत हंै। 26ण्9ः व्यवसायी अत्यधिक सहमत हंै।
2ण् स्वाभाविक अभिप्रेरण से संबंधित कथन में प्रशिक्षण के अवसर के प्रति 62ण्69ः ने सहमति तथा 17ण्91ः ने असहमति, 1ण्49ः ने अत्यधिक असहमति प्रदर्शित की है। पदोन्नति के मापदण्ड से संतुष्टि में 41ण्79ः व्यवसायी सहमत तथा 20 ;29ण्85ःद्ध व्यवसायी असहमत हंै। कुल 23ण्88ः व्यवसायी इसके लिए तटस्थ हैं। 70ण्15ः व्यवसायी की सहमति काम करने से आत्मसम्मान की वृद्धि के लिए है। इस हेतु कोई भी व्यवसायी अत्यधिक असहमत नहीं हैं। 70ण्15ः व्यवसायी की सहमति व्यक्तिगत विकास में योगदान के लिए है। जबकि कोई भी इससे असहमत नहीं है, इसी तरह सेमीनार एवं सम्मेलन में भाग लेने के अवसर की प्राप्त होने के लिए 59ण्70ः व्यवसायी सहमत हैं।
3ण् बाह्य अभिप्रेरण से संबंधित कथन ’’मैं चुनौती पूर्ण कार्य का आनंद लेता/लेती हूँ’’ में अधिकतम 65ण्67ः ने सहमति तथा न्यूनतम 1ण्49ः ने असहमति व्यक्त की है एवं 68ण्66ः ने यह सहमति व्यक्त की है कि उनको अच्छे कार्य के लिए प्रशंसा मिलती है। जबकि केवल 2 ने असहमति व्यक्त की है। कुल सहमति का माध्य 45ण्00 ज्ञात किया गया।
4ण् लिंग के आधार पर पूर्ण कार्य संतुष्टि में 22 महिलाएं संतुष्ट तथा 18 पुरुष संतुष्ट पाए गए। इसके लिए स्वतंत्रता की श्रेणी 4 पर काई वर्ग का मान 0.357 ज्ञात हुआ यह मान 0ण्05 सार्थकता स्तर पर प्राप्त मान से कम है, अतः शून्य परिकल्पना स्वीकार की जाती है, निष्कर्श प्राप्त हुआ कि लिंग के आधार पर कार्य संतुष्टि का कोई प्रभाव नहीं पड़ता इनके मध्य कोई सार्थक अंतर नहीं है।
5ण् कार्य अनुभव के आधार पर पूर्ण कार्य संतुष्टि में सर्वाधिक 5 से 9 वर्ष अनुभव वाले ग्रंथालय व्यवसायी कार्य से संतुष्ट हैं। परिकल्पना परीक्षण के अंतर्गत स्वतंत्रता की श्रेणी 16 के लिए काई वर्ग का मान 0.816 प्राप्त हुआ। यह मान 0.05 सार्थकता स्तर पर प्राप्त मान से कम है अतः शून्य परिकल्पना स्वीकार की गई। कार्य अनुभव कार्य संतुष्टि को प्रभावित नहीं करता, इनके मध्य कोई सार्थक अंतर नहीं हैं।
6ण् पद के आधार पर पूर्ण कार्य संतुष्टि में कुल 17 ग्रंथपाल कार्य से संतुष्ट पाए गए तथा 13 सहायक ग्रंथपाल संतुष्ट पाए गए। अतः परिकल्पना परीक्षण के अंतर्गत काई वर्ग का मान 16 स्वतंत्रता की श्रेणी के लिए 0ण्176 प्राप्त हुआ यह मान 0ण्05 सार्थकता स्तर पर प्राप्त से कम है अतः इनके मध्य कोई सार्थक अंतर नहीं है।
12. REFERENCE:
1. Kacherki Umesha Reddy and Kannur P V. Impact of Information Communication Tecnology on Job Satisfaction of Engineering College Librarians in Maharashtra. Iaslic Bulletin. 56, 3; 2011; p145:153.
2. Singh Angom Jeevan. Job Satisfaction of Library and Information in Academic Libraries : An evaluative study in Gargo Hills, Meghalaya. International Journal of Information Research. 4, 1; 2014; p1-9.
3. Biju R and A Ganesan. A study on Job Satisfaction among Public Library Professionals in Kerala. International Journal of Library and Information Studies. 5, 2; 2015; p114-118.
Received on 05.01.2019 Modified on 06.03.2019
Accepted on 29.04.2019 © A&V Publications All right reserved
Int. J. Rev. and Res. Social Sci. 2019; 7(2):474-480.